मजहब के नाम पर सिखाते ये आपस में बैर रखना
मजहब के नाम पर सिखाते
ये आपस में बैर रखना
पहले अंग्रेजों के गुलाम थे हम
अब अंग्रेजी के गुलाम बने है
कहीं जाति के नाम पर लडाते
कहीं क्षेत्र के नाम पर बांटते
कहीं धर्म के नाम पर कटा कर
कुर्सी के लिए देश तबाह करते।
कभी चंगेजों ने इसे लूटा
कभी फिरंगियों ने भी लूटा
अब चीन, पाक अमेरिका
से मिल कर लूटा रहे हैं
बने हुए है जो रहनुमा
वो ही वतन लुटा रहे हैं
आतंकी गद्दारों को ये
मिल कर बचा रहे हैं
देशभक्तों की आवाज को
गोलियों से दबा रहे है
शिक्षा के नाम पर आज
यहां गुलामी सिखा रहे हैं।
भारत के प्राण है गो गंगा
उनको कत्लगाहों में कटा रहे हैं
मजदूरो व मेहनतकशों को
ठेकेदारों से लुटा रहे हैं।
विकास के नाम पर देखो
भ्रष्टाचार का गटर बना हैं
धृतराष्ट्र बने है रहनुमा
कुशासन से देश रो रहा है
वंदे मातरम् न कह कर ये अब
फिरंगी सम्राट को ही दे रहें सलामी
हर दिन जल रहा यहां तिरंगा
गाये जा रहे है पाक के तराने
दूश्मन जो भी कर रहे हैं हमला
उन्हें बिरयानी रसगुल्ले खिला रहे हैं
और भारत की जनता को देखो ये
मंहगाई भ्रष्टाचार से मार रहे हैं।।
-देवसिंह रावत
(प्रातः 9 बजे, शंनिवार 10 अगस्त, 2013)

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