Friday, August 9, 2013


मजहब के नाम पर सिखाते ये आपस में बैर रखना


मजहब के नाम पर सिखाते 
ये आपस में बैर रखना
पहले अंग्रेजों के गुलाम थे हम 
अब अंग्रेजी के गुलाम बने है

कहीं जाति के नाम पर लडाते
कहीं क्षेत्र के नाम पर बांटते
कहीं धर्म के नाम पर कटा कर
कुर्सी के लिए देश तबाह करते।


कभी चंगेजों ने इसे लूटा
कभी फिरंगियों ने भी लूटा
अब चीन, पाक अमेरिका
से मिल कर लूटा रहे हैं

बने हुए है जो रहनुमा 
वो ही वतन लुटा रहे हैं
आतंकी गद्दारों को ये 
मिल कर बचा रहे हैं

देशभक्तों की आवाज को
गोलियों से दबा रहे है
शिक्षा के नाम पर आज 
यहां गुलामी सिखा रहे हैं। 

भारत के प्राण है गो गंगा
उनको कत्लगाहों में कटा रहे हैं
मजदूरो व मेहनतकशों को
ठेकेदारों से लुटा रहे हैं।


विकास के नाम पर देखो
भ्रष्टाचार का गटर बना हैं
धृतराष्ट्र बने है रहनुमा
कुशासन से देश रो रहा है 

वंदे मातरम् न कह कर ये अब
फिरंगी सम्राट को ही दे रहें सलामी 
हर दिन जल रहा यहां तिरंगा
गाये जा रहे है पाक के तराने 

दूश्मन जो भी कर रहे हैं हमला
उन्हें बिरयानी रसगुल्ले खिला रहे हैं
और भारत की जनता को देखो ये
मंहगाई भ्रष्टाचार से मार रहे हैं।।

-देवसिंह रावत
(प्रातः 9 बजे, शंनिवार 10 अगस्त, 2013)

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